असर
न्यूज़
Loading weather & fuel prices...
Trending
लोड हो रहा है...
बदलती जीवनशैली से बच्चों में बढ़ रहा गैर-संचारी रोगों का खतरा, जागरूकता में मीडिया की भूमिका अहम
Tuesday, July 14, 2026

बदलती जीवनशैली से बच्चों में बढ़ रहा गैर-संचारी रोगों का खतरा, जागरूकता में मीडिया की भूमिका अहम

Share:

मोबाइल पर लगातार रील्स, जंक फूड, घटती शारीरिक गतिविधि और बढ़ता तनाव बच्चों को कम उम्र में ही मोटापा, मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की ओर धकेल रहा है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि समय रहते रोकथाम नहीं हुई तो यह बड़ा जनस्वास्थ्य संकट बन सकता है।

बदलती जीवनशैली से बच्चों में बढ़ रहा गैर-संचारी रोगों का खतरा, जागरूकता में मीडिया की भूमिका अहम

नई दिल्ली/नागपुर, 14 जुलाई। बच्चों और किशोरों में गैर-संचारी रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल पर घंटों रील्स देखना, जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी, अनियमित दिनचर्या और मानसिक तनाव बच्चों को मोटापा, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोगों के जोखिम और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर ले जा रहे हैं।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यूनिसेफ इंडिया, प्रेस सूचना ब्यूरो-पश्चिमी क्षेत्र और एम्स नागपुर की ओर से आयोजित दो दिवसीय मीडिया कार्यशाला एम्स नागपुर में संपन्न हुई। इसमें पश्चिमी और मध्य भारत के 30 से अधिक पत्रकारों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य 5 से 9 वर्ष के बच्चों तथा 10 से 19 वर्ष के किशोरों में बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों के प्रति मीडिया को संवेदनशील बनाना और स्वास्थ्य रिपोर्टिंग को अधिक तथ्यपरक, जिम्मेदार एवं प्रभावी बनाना था।

विशेषज्ञों ने बताया कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बीमारियों की समय पर पहचान और विशेषज्ञ उपचार तक पहुंच सीमित है। वहीं शहरी क्षेत्रों में स्क्रीन टाइम, असंतुलित खानपान और निष्क्रिय जीवनशैली प्रमुख खतरे बन रहे हैं।

पीआईबी-पश्चिमी क्षेत्र की महानिदेशक स्मिता वत्स शर्मा ने कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है। मीडिया समाज में जागरूकता बढ़ाने और व्यवहार परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम है।

एम्स नागपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रशांत जोशी ने कहा कि कई गैर-संचारी रोगों की शुरुआत बचपन में हो जाती है, लेकिन लक्षण वर्षों बाद सामने आते हैं। इसलिए शीघ्र पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच और निगरानी बेहद जरूरी है।

यूनिसेफ इंडिया की संचार एवं सहयोग प्रमुख ज़ाफरीन चौधरी ने सटीक और संवेदनशील रिपोर्टिंग पर जोर दिया। कार्यशाला में पत्रकारों ने बाल रोग उत्कृष्टता केंद्र का दौरा कर चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और बच्चों से संवाद भी किया।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि संतुलित भोजन, नियमित खेल-कूद, स्क्रीन टाइम में कमी और समय पर जांच से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर रोका जा सकता है। परिवार, विद्यालय, स्वास्थ्य संस्थान और मीडिया का साझा प्रयास बच्चों को स्वस्थ भविष्य दे सकता है।

#ChildHealth #NCDs #JunkFood #ScreenTime #ChildhoodObesity #DiabetesAwareness #MentalHealth #UNICEFIndia #AIIMSNagpur #HealthJournalism