
मासिक धर्म स्वास्थ्य अब सिर्फ एक चर्चा नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार: भुवनेश्वर में ओएमएचएच एलायंस का राज्यस्तरीय संवाद
मासिक धर्म (Periods) से जुड़ी चुप्पी को तोड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि अब समय आ गया है कि इसे एक 'मौलिक अधिकार' और 'गरिमा' के मुद्दे के रूप में स्थापित किया जाए। इसी विचार को धरातल पर उतारने के लिए, वैश्विक मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (Menstrual Hygiene Day) के अवसर पर भुवनेश्वर में एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय संवाद आयोजित किया गया।
'राइजिंग टुगेदर': एक साझा पहल आईना (Aina) के नेतृत्व में, 'ओडिशा मॉन्स्ट्रुअल हेल्थ एंड हायजीन एलायंस' (OMHH Alliance) ने “राइजिंग टुगेदर: ट्रांसफॉर्मिंग मेंस्ट्रुअल हेल्थ ऐज़ ए फंडामेंटल राइट” विषय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मंच पर सरकार, शिक्षाविद्, सामाजिक संगठन, कानूनी विशेषज्ञ और युवा प्रतिनिधि एक साथ आए ताकि एक 'पीरियड-फ्रेंडली' समाज का निर्माण किया जा सके।
प्रमुख विचार और विमर्श:
- अधिकार-आधारित दृष्टिकोण: कार्यक्रम की शुरुआत स्नेहा मिश्रा (सचिव, आईना एवं संयोजक, ओएमएचएच एलायंस) के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है; इसे गरिमा और समानता के केंद्र में होना चाहिए।
- कानूनी मान्यता की आवश्यकता: जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की प्रो. (डॉ.) सौम्या उमा ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान गरिमा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी जवाबदेही और संस्थागत जिम्मेदारी अनिवार्य है।
- नवाचार और समावेशिता: आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक प्रो. श्रीपद करमलकर ने सिस्टम थिंकिंग पर जोर देते हुए समावेशी और टिकाऊ समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
- बदलती सोच: यूनिसेफ ओडिशा के प्रसांत कुमार दास ने माना कि बातचीत तो बदल रही है, लेकिन अब भी युवाओं को सामाजिक कलंक (Stigma) का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्कूलों और कार्यस्थलों को 'पीरियड-फ्रेंडली' बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।
- सुरक्षित वातावरण का निर्माण: ओएससीपीसीआर (OSCPCR) की अध्यक्ष बबीता पात्रा और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शाइनी एस., आईपीएस ने किशोरों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और कलंक-मुक्त वातावरण तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई।
युवाओं की आवाज और सामूहिक संकल्प कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण 'जेन-ज़ी और मेंस्ट्रुअल राइट्स' विषय पर हुई चर्चा रही, जहाँ युवाओं ने खुलकर अपने विचार रखे। दिन भर चले विभिन्न पैनल डिस्कशंस में शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के निर्माण और सेवाओं तक सबकी पहुँच को सुनिश्चित करने पर गहन मंथन किया।
अंत में, यूनिसेफ की शिप्रा सक्सेना ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इस लड़ाई को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।
निष्कर्ष यह संवाद स्पष्ट करता है कि केवल जागरूकता फैलाना ही काफी नहीं है; हमें मासिक धर्म से जुड़ी जानकारी, सुरक्षित उत्पादों, स्वच्छ सुविधाओं और सबसे महत्वपूर्ण—एक गरिमापूर्ण वातावरण को हर व्यक्ति तक पहुँचाना होगा।
ओएमएचएच एलायंस के सदस्य संगठनों—जैसे आईना, यूनिसेफ, आईआईटी भुवनेश्वर, एआईआईएमएस, वॉटर एड, नावो, आत्मशक्ति ट्रस्ट और अन्य सहयोगियों की यह पहल एक उज्ज्वल और समावेशी भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है।
आइए, साथ मिलकर एक 'पीरियड-फ्रेंडली' समाज का निर्माण करें!
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